गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

सैंडविच का विरोधाभास

 

सैंडविच का विरोधाभास

एलेना यिनोवा


अनुवाद

आ. चारुमति रामदास

 

मैं किचन में बैठी थी, चाय पी रही थी और उकता रही थी. आप एक शरीफ एस्ट्रो फिज़िसिस्ट को कानूनी छुट्टी वाले दिन और क्या करने को कहेंगे? बर्तन धो दिए, क्वार्टर की सफाई कर दी, खाना बना लिया, और मेरे दिमाग को परेशान कर रही समस्या – अराजकता और अचूकता के कष्टप्रद पड़ोस की स्थिति को, गुरुत्वाकर्षण तरंगों की सहायता से, जो पृथ्वी से बीस मिलियार्ड प्रकाश वर्षों की दूरी पर स्थित दो सुपरमासिव ब्लैक होल्स में विलीन हो रही हैं, मैं कल ऑफिस में हल करूंगी. मगर बदहवासी मुझे छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी.  

“साश्का, मैंने ‘टाईम मशीन का आविष्कार कर लिया है!”

मैंने उदासी से किचन में भागकर आते हुए सहकारी को देखा – बदहवास, आंखें जल रही थीं, हाथों में कुछ गणना पत्रक और कोई एक बॉक्स था – और पूछा:

“तो, क्या हुआ?

“मतलब?” वह परेशान हो गया. “ये ‘तो क्या हुआ’ किसलिए? टाईम मशीन!”

“इसका सामान्य रूप से मानवता को, और मुझे – अंशत: , कैसे लाभ होगा?” मैंने पूछा.

“आ...”

“आहा. पिछले हफ़्ते तुमने ‘डैनी के विरोधाभास को हल करके कमसे कम जीव वैज्ञानिकों और ‘वाटर स्केटर्स की सहायता की थी, मगर ये “टाईम मशीन” का आविष्कार तुमने किसके लिए किया है? यही तो बात है...तुम्हारे सभी आविष्कारों की प्रकृति अनुमानात्मक है, जबकि उन्हें लाभदायक होना चाहिए और फ़ायदा पहुंचाने वाला होना चाहिए. जैसे, देखो – मैंने हाथों में ब्रेड, मक्खन और चाकू लिया है, और सैंडविच बना रही हूँ, - चाकू, ब्रेड औए मक्खन का आविष्कार – मानवता की भलाई के लिए महानतम आविष्कार है, और कुछ अंशों में मेरे लिए भी. मैं तृप्त हो जाऊंगी. या तुम.”

ब्रेड पर मक्खन लगाकर मैंने उसे स्तब्ध भौतिक वैज्ञानिक की ओर बढ़ा दिया.

“चाय बनाऊँ?

“तुम समझती नहीं हो...”

“ये, तुम नहीं समझ रहे हो. जैसे, मान लो, अगर तुम अभी फ़ौरन अपने आप को, या, मान लो, मुझे समय के आयाम में आगे या पीछे भेजते हो. एक प्रलय आरंभ हो जाएगा दादा जी के, पोल्चीन्स्की के  विरोधाभासों से,  और हिटलर की ह्त्या से, समूचा भौतिक विज्ञान एक ही प्रख्यात जगह पर चलेगा, तुम्हें नोबेल पुरस्कार मिलेगा, पूरी दुनिया में तुम्हारे आविष्कार का प्रसार होने लगेगा, लोग भूतकाल में जाने लगेंगे और भविष्य में भी इस तरह टहलने लगेंगे, जैसे अपने घर में घूम रहे हों...जैसे तुम मेरे पास टपक पड़े” – मैंने अपने सहकारी को छुपा हुआ ताना दिया, मगर उसे कोई परवाह नहीं थी. _ “या इसके विपरीत, वे तुम्हारा वर्गीकरण करेंगे, तुम्हारी मशीन का, सभी डेटा का...मगर, फ़ायदा, फ़ायदा कहाँ है?   

“विज्ञान के लिए फ़ायदा होगा,” उसने नाराज़ी से कहा और चमचमाते हुए, अर्धपारदर्शी, तारों और स्विचों वाले डिब्बे को मेज़ पर रखा, जिसकी दीवारों से उसके केंद्र में रखा, गुरुत्वाकर्षण के सभी नियमों के बावजूद चमकदार-नीला क्रिस्टल मंडरा रहा था. – “ये रहा! विल्चेक का ‘टेम्पोरल क्रिस्टल! क्या मैं, मैं फ़ौरन तुम्हारे सैंडविच को भूतकाल में भेज दूं? दिन... छः महीनों के लिए!”

इससे पहले कि मैं कुछ कहती, उसने अपने उपकरण में कुछ डाला और सैंडविच गायब हो गया. मगर पांच सेकण्ड बाद वापस अवतरित हो गया. किसी ने उसे अच्छी तरह से खाया था. कुछ देर हम उस खाए हुए सैंडविच की ओर देखते रहे. फिर मैंने हिम्मत बटोरकर उसमें उंगली गड़ाई – मानो उसे अभी अभी फ्रीज़र से निकाला गया हो. मैंने गहरी सांस ली.

“ये अच्छा है कि सब कुछ अच्छी तरह से समाप्त हो रहा है. तुमने, बेशक, सैंडविच को छः महीनों के लिए भेजते हुए सोचा नहीं था, की हमारा ग्रह सूरज के दूसरी तरफ होगा? इसीलिये ये ठंडा है.”

“मगर उसे किसने कुतरा है?

“यही तो सदी की पहेली है. सुनो, तुम सही कह रहे हो. तुम्हारा उपकरण उपयोगी तो है, अब मुझे जीना ‘बोरिंग’ नहीं लगता. ठीक है, खामोश क्यों हो गए? चलो, अंतरिक्ष यात्रियों के पास चलें, स्पेससूट  लेंगे और जांच करेंगे, कि खुले अंतरिक्ष में सैंडविच कौन कुतरता है.”

 

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